
रायपुर।
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY 2.0) के नियमों में बड़ा और अहम बदलाव करते हुए साफ कर दिया है कि अब योजना का लाभ केवल उन्हीं हितग्राहियों को मिलेगा, जिनकी जमीन या निवास 31 अगस्त 2024 से पहले खरीदी या स्थापित हो चुकी है। इसके बाद खरीदी गई जमीन पर पीएम आवास योजना की राशि नहीं दी जाएगी।
सरकार का यह फैसला फर्जीवाड़े, अवैध कब्जों और योजना के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने के उद्देश्य से लिया गया है। नए नियमों के तहत अब पात्रता प्रमाण पत्र (Eligibility Certificate) प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक सख्त और जांच-परख वाला होगा।
पुराने दस्तावेज होंगे अनिवार्य
हितग्राहियों को यह साबित करना होगा कि वे निर्धारित तिथि से पहले उसी स्थान पर निवास कर रहे थे। इसके लिए पुराने बिजली या पानी के बिल, नगर निगम या पंचायत के रिकॉर्ड, संपत्ति कर की रसीद, या मतदाता सूची में नाम होना आवश्यक माना जाएगा। प्रशासन अब जीआईएस मैपिंग और सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए भी जमीन की स्थिति की जांच करेगा।
निगम, पालिका और पंचायतों में बनी सर्वे टीमें
पात्रता जांच के लिए नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत स्तर पर विशेष सर्वे टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगी और तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगी। यदि मकान बंद, जर्जर या उपयोग में नहीं पाया गया तो ऐसे मामलों में प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा।
इन मामलों में नहीं मिलेगा लाभ
यदि जमीन सड़क सीमा, तालाब, नाला, हाईटेंशन लाइन क्षेत्र, या किसी विकास परियोजना से प्रभावित क्षेत्र में आती है, तो ऐसे हितग्राही भी योजना के दायरे से बाहर होंगे। साथ ही, आबादी भूमि छोड़कर अन्य भूमि पर कब्जा करने वालों को भी अपात्र माना जाएगा।
चार किस्तों में मिलेगा आवास का पैसा
पात्रता प्रमाण पत्र जारी होने के बाद ही हितग्राही को पीएम आवास की राशि चार किस्तों में दी जाएगी। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन अनिवार्य होगा।
सरकार का स्पष्ट संदेश
सरकार का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि योजना का लाभ वास्तव में जरूरतमंद और वास्तविक गरीब परिवारों तक पहुंचे, न कि उन लोगों तक जो बाद में जमीन खरीदकर या अवैध कब्जा कर लाभ लेना चाहते हैं।
पीएम आवास योजना 2.0 के ये नए नियम आम लोगों के लिए चेतावनी भी हैं और सही पात्रों के लिए अवसर भी।



