
जैजैपुर। जनपद पंचायत जैजैपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटेतरा में विकास कार्यों में बाधा डालने और जनहित के कार्यों को प्रभावित करने का मामला सामने आया है। गाँव में जलभराव की समस्या से राहत दिलाने के लिए सरपंच द्वारा शासकीय भूमि पर बनाई गई वैकल्पिक कच्ची नाली को कुछ लोगों ने मिट्टी डालकर पाट दिया। इससे एक बार फिर गाँव में पानी भरने लगा है और स्कूली बच्चों तथा राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम कोटेतरा में लंबे समय से जलनिकासी की समस्या बनी हुई थी। ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए सरपंच ने अपने स्तर पर पहल कर सरकारी भूमि पर दो बार वैकल्पिक कच्ची नाली का निर्माण कराया था। नाली बनने के बाद पानी की निकासी सुचारू रूप से होने लगी थी और ग्रामीणों को राहत मिली थी।

विकास कार्य से नाराज होकर नाली पाटने का आरोप
सरपंच का आरोप है कि कुछ असामाजिक एवं विकास विरोधी तत्वों ने राजनीतिक रंजिश और निजी स्वार्थ के चलते नाली को मिट्टी डालकर बंद कर दिया। इतना ही नहीं, उनके खिलाफ ग्रामीणों के बीच भ्रामक प्रचार कर उनकी सामाजिक छवि धूमिल करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस ने खुद खुलवाई थी नाली, फिर भी दोबारा कर दी गई बंद
बताया गया कि मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस से की गई थी। शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्वयं कच्ची नाली को दोबारा खुलवाया था। इसके बावजूद अज्ञात लोगों ने फिर से नाली को पाट दिया, जिससे क्षेत्र में जलभराव की स्थिति दोबारा बन गई।
स्कूली बच्चों और राहगीरों पर बढ़ा संकट
नाली बंद होने से गंदा पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। इससे न केवल आवागमन प्रभावित हो रहा है, बल्कि स्कूली बच्चों, ग्रामीणों और राहगीरों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। साथ ही गंदे पानी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
मनरेगा से पक्की नाली की स्वीकृति, नई गाइडलाइन का इंतजार
सरपंच ने बताया कि स्थायी समाधान के लिए मनरेगा के तहत पक्की नाली निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है। हालांकि मनरेगा योजना में जी.आर.जी. (नई व्यवस्था) लागू होने और गाइडलाइन में बदलाव के कारण निर्माण कार्य फिलहाल शुरू नहीं हो सका है। नई गाइडलाइन जारी होते ही पक्की नाली का निर्माण कराया जाएगा।
कड़ी कार्रवाई की मांग
सरपंच एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि शासकीय कार्य में बाधा डालने, सरकारी भूमि पर बने जनहित के ढांचे को नुकसान पहुंचाने तथा मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में विकास कार्यों में इस तरह की रुकावट न आए और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित न होना पड़े।



