
बिलासपुर। राज्य में प्लास्टिक की बोतलों में शराब की बिक्री शुरू होने के बाद इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई उपभोक्ताओं का दावा है कि शराब के सेवन के बाद उन्हें भूख न लगना, गैस बनना, पेट फूलना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि पहले कांच की बोतलों में मिलने वाली शराब की गुणवत्ता बेहतर महसूस होती थी, जबकि प्लास्टिक की बोतलों में मिलने वाली शराब को लेकर उन्हें संतुष्टि नहीं है। वहीं, कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि प्लास्टिक की खाली बोतलों का दुरुपयोग और कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ गई है।
इधर, स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों को लेकर भी कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अब तक स्वास्थ्य विभाग या संबंधित अधिकारियों की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसमें इन समस्याओं का सीधा संबंध प्लास्टिक की बोतलों में बिक रही शराब से बताया गया हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक शराब का सेवन स्वयं पाचन संबंधी परेशानियों सहित कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। यदि किसी व्यक्ति को शराब के सेवन के बाद लगातार स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें हो रही हैं, तो उसे तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
अब देखना होगा कि उपभोक्ताओं की इन शिकायतों को सरकार और आबकारी विभाग किस गंभीरता से लेते हैं तथा इस मामले में गुणवत्ता की जांच या अन्य कदम उठाए जाते हैं या नहीं।



