
सक्ती, 26 जुलाई 2026।
सक्ती जिले के हसौद थाना परिसर से शनिवार शाम एक बेहद दुखद घटना सामने आई, जिसने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर कर रख दिया। हसौद थाने में पदस्थ आरक्षक जय कुमार लहरे ने थाना भवन की ऊपरी मंजिल स्थित एक कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
घटना की जानकारी मिलते ही थाना स्टाफ मौके पर पहुंचा और तत्काल उन्हें नीचे उतारकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हसौद ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और परिजनों को सौंप दिया गया।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
घटना की सूचना मिलते ही आरक्षक के परिवार में मातम छा गया। अस्पताल पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी, बच्चों और रिश्तेदारों के आंसुओं के बीच हर किसी के मन में एक ही सवाल था—आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक पुलिस जवान ने इतना बड़ा कदम उठा लिया? फिलहाल परिजन इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं और कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं।
कारण अभी स्पष्ट नहीं, जांच जारी
पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आत्महत्या के पीछे के कारणों का फिलहाल खुलासा नहीं हो पाया है। अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू से जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण सामने आएंगे।

मानसिक दबाव पर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पुलिसकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल पर बढ़ते तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार ड्यूटी, सीमित स्टाफ, चौबीसों घंटे जिम्मेदारियां, सामाजिक दबाव और पारिवारिक चुनौतियां कई बार पुलिसकर्मियों पर गहरा मानसिक प्रभाव डालती हैं। ऐसे मामलों ने यह आवश्यकता भी उजागर की है कि पुलिस विभाग में मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग और भावनात्मक सहयोग की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
एक दर्दनाक संदेश
आरक्षक जय कुमार लहरे की असमय मृत्यु केवल एक पुलिसकर्मी की मौत नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों के टूटने की पीड़ा है। यह घटना समाज और व्यवस्था दोनों के लिए एक गंभीर संदेश है कि मानसिक तनाव को समय रहते पहचानना और सहायता उपलब्ध कराना कितना आवश्यक है।
फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है और आत्महत्या के वास्तविक कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।



