छत्तीसगढ़ताजातरीनराजनीतिराज्य

छत्तीसगढ़ – डोंगरगढ़ भाजपा में बगावत! गुटबाजी और उपेक्षा से नाराज दर्जनों नेताओं का सामूहिक इस्तीफा, संगठन में मचा हड़कंप

📍 डोंगरगढ़ | राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट सामने आया है। शहर मंडल में लंबे समय से चल रही कथित गुटबाजी, पक्षपात और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी से नाराज होकर दर्जनों वरिष्ठ नेताओं, पूर्व पार्षदों, विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारियों और बूथ अध्यक्षों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम ने भाजपा संगठन में हलचल तेज कर दी है।

इस्तीफा देने वाले नेताओं ने भाजपा जिलाध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत को भेजे गए त्यागपत्र में शहर मंडल अध्यक्ष जसमीत सिंह बन्नोआना की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि संगठन में निर्णय कुछ चुनिंदा लोगों के प्रभाव में लिए जा रहे हैं, जबकि वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है।

कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पूर्व विधायक एवं प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष रामजी भारती तथा शहर के कुछ प्रभावशाली व्यापारिक नेताओं के दबाव में संगठन का संचालन हो रहा है। पदों के वितरण में पक्षपात और परिवारवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर वर्षों से सक्रिय कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है। इससे नाराज होकर उन्हें सामूहिक इस्तीफा देने जैसा बड़ा कदम उठाना पड़ा।

इस्तीफा देने वालों में पूर्व मनोनीत पार्षद एवं सांसद प्रतिनिधि परविंदर सिंह भाटी, वरिष्ठ भाजपा नेता अशोक साहू, पूर्व महिला मोर्चा अध्यक्ष ज्योति बादनाईक, पूर्व भाजयुमो अध्यक्ष प्रिंस सिंह उब्बे, विरेन्द्र साहू, संतोष राव, अखिलेश सिंह गढ़वाल, कमलेश काले, अंबर कुमार श्यामुकर सहित महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, किसान मोर्चा, पिछड़ा वर्ग मोर्चा और अनुसूचित जाति मोर्चा के अनेक पदाधिकारी एवं बूथ अध्यक्ष शामिल हैं।

कार्यकर्ताओं ने अपने सामूहिक त्यागपत्र की प्रतिलिपि भाजपा के प्रदेश एवं राष्ट्रीय नेतृत्व को भी भेजी है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि स्थानीय संगठन में असंतोष अब शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच चुका है।

क्या होगा अगला कदम?

डोंगरगढ़ में एक साथ इतने बड़े स्तर पर हुए इस्तीफों ने भाजपा संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सभी की निगाहें पार्टी के प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह इस अंदरूनी विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है और नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने में कितना सफल होता है।

(नोट: यह समाचार इस्तीफा देने वाले नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button