
सक्ती। जिले के जैजैपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम करौवाडीह में पदस्थ एक हल्का पटवारी पर भूमि संबंधी प्रकरण में गंभीर आरोप लगे हैं। ग्राम करौवाडीह निवासी कमलेश कुमार टंडन ने कलेक्टर सक्ती को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि भूमि बिक्री प्रतिवेदन तैयार करने के नाम पर उनसे ₹5 हजार की राशि ली गई, लेकिन इसके बावजूद राजस्व अभिलेखों में दर्ज त्रुटियों का निराकरण नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कमलेश कुमार टंडन की पैतृक भूमि से जुड़े राजस्व अभिलेखों में नाम संबंधी त्रुटियां लंबे समय से दर्ज हैं। इन त्रुटियों के सुधार के लिए उन्होंने संबंधित राजस्व अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भूमि बिक्री प्रतिवेदन तैयार करने का दायित्व हल्का पटवारी ज्ञान बाई टंडन को सौंपा गया था, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड का समुचित परीक्षण किए बिना ही ऐसा प्रतिवेदन तैयार कर दिया गया जो वास्तविक अभिलेखों एवं तथ्यों से मेल नहीं खाता।
₹5 हजार लेने का आरोप, फिर भी नहीं हुआ सुधार
शिकायत में दावा किया गया है कि भूमि बिक्री प्रतिवेदन तैयार करने के एवज में उनसे ₹5 हजार की राशि ली गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि राशि देने के बाद भी न तो उनकी समस्या का समाधान हुआ और न ही रिकॉर्ड में दर्ज त्रुटियों को सुधारा गया। परिणामस्वरूप आज भी राजस्व अभिलेखों में वही गलतियां बनी हुई हैं, जिससे उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राजस्व रिकॉर्ड की पुनः जांच की मांग
कमलेश कुमार टंडन ने कलेक्टर से मांग की है कि संबंधित भूमि के बी-1, खसरा, नामांतरण सहित सभी राजस्व अभिलेखों की पुनः जांच कराई जाए तथा वास्तविक तथ्यों के आधार पर आवश्यक संशोधन किए जाएं। साथ ही उन्होंने आरोपित पटवारी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने तथा कथित रूप से ली गई राशि वापस दिलाने की भी मांग की है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
मामला अब कलेक्टर कार्यालय पहुंच चुका है और शिकायत प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। पूरे मामले की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। क्षेत्र के लोगों की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
(नोट: यह खबर शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)



