
सक्ती // जैजैपुर — ग्राम पंचायत कोटेतरा की एक जर्जर पुलिया अब स्थानीय लोगों के लिए खतरे की घंटी बन चुकी है। कोटेतरा बस स्टैंड से केकराभाट जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित यह पुलिया हर दिन सैकड़ों लोगों की आवाजाही का केंद्र है, लेकिन इसकी बदहाल स्थिति कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है।
⚠️ जीवन रेखा बनी “खतरे की रेखा”
मुख्य नहर के ऊपर बनी यह पुलिया क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती है। यह न केवल कोटेतरा बल्कि आसपास के कई गांवों को जोड़ने का एकमात्र सशक्त मार्ग है। लेकिन वर्षों से मरम्मत न होने के कारण इसकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी है।
- पुलिया में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं
- किनारे टूटकर कमजोर हो गए हैं
- भारी वाहनों के गुजरते ही हिलने जैसी स्थिति बनती है
🧑🌾 ग्रामीणों में डर, किसानों में चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि यहां आए दिन छोटे-छोटे हादसे होते रहते हैं। रात के समय या बारिश में स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।
- किसानों को फसल मंडी तक ले जाने में जोखिम उठाना पड़ रहा है
- कभी भी पुलिया ढहने से पूरे क्षेत्र का संपर्क कट सकता है
- स्कूली बच्चों और रोज़मर्रा के यात्रियों की जान खतरे में

✊ सरपंच सुनीता रमेश साहू की पहल
ग्राम पंचायत कोटेतरा की सरपंच श्रीमती सुनीता रमेश साहू ने इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज नहीं किया। उन्होंने जल संसाधन विभाग, सक्ती के कार्यपालन अभियंता को पत्र लिखकर तत्काल निरीक्षण और मरम्मत की मांग की है।
सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने इस मुद्दे को उच्च स्तर तक पहुंचाते हुए मंत्री श्री केदार कश्यप को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजी है, ताकि जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई हो सके।
🏛️ अब प्रशासन की परीक्षा
ग्रामीणों में आक्रोश साफ नजर आ रहा है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब सरपंच की सक्रियता ने उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन असली सवाल यही है—
👉 क्या प्रशासन समय रहते इस “मौत के पुल” को सुरक्षित बना पाएगा?
📢 ग्राउंड रिपोर्ट का निष्कर्ष:
कोटेतरा की यह पुलिया सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि हजारों लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी का आधार है। अगर समय रहते इसकी मरम्मत नहीं की गई, तो यह समस्या किसी बड़े हादसे में बदल सकती है। अब जिम्मेदारी प्रशासन की है कि वह इस चेतावनी को गंभीरता से ले और त्वरित कार्रवाई करे।



