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छत्तीसगढ़ – बेमेतरा से उठी अजब मांग: “शराब की बोतलों पर भी लगाइए नेताओं की तस्वीर!”

सुशासन तिहार के आवेदन ने सोशल मीडिया पर मचा दी सनसनी

बेमेतरा।
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से सामने आए एक अनोखे आवेदन ने सोशल मीडिया पर जबरदस्त हलचल मचा दी है। आमतौर पर सड़क, बिजली, पानी और राशन जैसी समस्याओं के लिए लगाए जाने वाले “सुशासन तिहार 2026” शिविर में इस बार एक ऐसी मांग पहुंची, जिसने लोगों को हंसने पर भी मजबूर कर दिया और सोचने पर भी।

नवागढ़ क्षेत्र के निवासी सतीश मारकंडे ने आबकारी विभाग को दिए आवेदन में मांग की है कि जिस तरह सरकारी योजनाओं, राशन कार्ड, थैलों और प्रचार सामग्री पर मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों की तस्वीरें लगाई जाती हैं, उसी तरह सरकारी शराब दुकानों में बिकने वाली शराब की बोतलों पर भी नेताओं की तस्वीरें लगाई जानी चाहिए।

📄 आवेदन में लिखा गया तीखा तर्क

आवेदन में युवक ने तर्क देते हुए लिखा कि जब सरकार की लगभग हर योजना और प्रचार सामग्री में नेताओं की तस्वीरें दिखाई देती हैं, तो फिर शराब की बोतलों को इससे अलग क्यों रखा जाए? युवक ने मुख्यमंत्री के साथ-साथ आबकारी मंत्री की तस्वीर लगाने की भी मांग कर डाली।

बस फिर क्या था… आवेदन की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मीम्स और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।

🔥 सोशल मीडिया पर लोगों ने लिए मजे

वायरल आवेदन पर लोग तरह-तरह के मजेदार कमेंट कर रहे हैं।
किसी ने लिखा —

“अब पैग लगाने से पहले फोटो को प्रणाम करना पड़ेगा क्या?”

तो किसी ने तंज कसते हुए कहा —

“सरकारी प्रचार का दायरा अब सीधे बोतल तक पहुंच गया!”

कई लोगों ने इसे सरकारी प्रचार-प्रसार पर किया गया एक तीखा व्यंग्य बताया, जबकि कुछ लोग इसे व्यवस्था पर जनता की नाराजगी का नया तरीका मान रहे हैं।

🎯 व्यंग्य या जनता की सोच?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह आवेदन भले ही मजाकिया अंदाज में लिखा गया हो, लेकिन इसके पीछे सरकारी योजनाओं में लगातार बढ़ती राजनीतिक ब्रांडिंग पर जनता की सोच भी झलकती है।
“सुशासन तिहार” जैसे मंच पर इस तरह का आवेदन सामने आना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया है।

🤔 अब विभाग क्या करेगा?

फिलहाल अधिकारियों की ओर से इस आवेदन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि आवेदन क्रमांक और उसकी तस्वीर वायरल होने के बाद मामला जिलेभर में चर्चा का केंद्र बन गया है।

🗣️ अब सवाल जनता से…

अगर सरकारी योजनाओं और सामानों पर नेताओं की तस्वीरें लग सकती हैं, तो क्या शराब की बोतलों पर भी लगनी चाहिए?
या फिर यह सिर्फ सिस्टम पर किया गया एक करारा व्यंग्य है?

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