
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत इन दिनों एक ऐसे प्रशासनिक विवाद से गर्म है, जिसने सरकार की कार्यप्रणाली और जवाबदेही दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़ा है, जहां मंत्री के OSD पर अचानक गाज गिरा दी गई, जबकि संबंधित मामले की आधिकारिक जांच अभी पूरी भी नहीं हुई है।
जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट सामने आने से पहले ही OSD के खिलाफ कार्रवाई होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। विपक्ष इसे “बलि का बकरा” बनाने की रणनीति बता रहा है, वहीं प्रशासनिक हलकों में भी इस कदम को लेकर असहजता दिखाई दे रही है।
विपक्ष के हमलों के बीच अचानक कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से विभाग से जुड़ा एक विवाद लगातार सरकार के लिए परेशानी का कारण बना हुआ था। विपक्ष मंत्री को सीधे निशाने पर ले रहा था और पूरे मामले में जवाब मांग रहा था। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक सवाल उठ रहे थे।
इसी बीच अचानक मंत्री कार्यालय की ओर से OSD पर कार्रवाई की खबर सामने आई। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या मंत्री ने अपने ऊपर बढ़ते राजनीतिक दबाव को कम करने के लिए अपने करीबी अधिकारी को जिम्मेदार ठहरा दिया?
सबसे बड़ा सवाल— जब जांच पूरी नहीं हुई तो दोषी कौन?
पूरा विवाद अब एक मूल सवाल पर टिक गया है— जब जांच रिपोर्ट अभी आई ही नहीं, तब यह कैसे तय हो गया कि गलती OSD की थी?
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि सामान्य प्रक्रिया में पहले जांच होती है, तथ्य जुटाए जाते हैं, जवाबदेही तय की जाती है और उसके बाद कार्रवाई होती है। लेकिन यहां पूरी प्रक्रिया उलटी दिखाई दे रही है।
यही वजह है कि अब सरकार की मंशा और कार्रवाई की टाइमिंग दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।
“पर्दे के पीछे कोई और?”— विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म
विभागीय सूत्रों के बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि वास्तविक संचालन किसी और स्तर से किया जा रहा था। पिछले कुछ दिनों में सामने आई खबरों में भी पर्दे के पीछे सक्रिय कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर चर्चाएं हुई थीं।
सुनने में यह भी आया है कि विभाग में एक अधिकारी को कथित रूप से अनाधिकृत तरीके से अटैच कर महत्वपूर्ण काम कराए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, विभागीय जांच का सामना कर चुके एक विवादित अधिकारी को फिर से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाने की तैयारी की चर्चाएं भी राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तैर रही हैं।
विपक्ष का हमला— “मंत्री खुद को बचाने में लगी हैं”
विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को हाथोंहाथ लेते हुए सरकार और मंत्री दोनों पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह “बलि का बकरा” बनाने का सीधा मामला है।
उनका आरोप है कि मंत्री अपनी राजनीतिक छवि और पद को बचाने के लिए पूरे मामले का ठीकरा OSD पर फोड़ना चाहती हैं। विपक्ष ने निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा है कि सच्चाई सामने आनी चाहिए और जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर डालकर मामले को दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
“OSD अकेले बड़े फैसले नहीं ले सकता”
राजनीतिक विशेषज्ञ भी इस मामले को सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई मानने को तैयार नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि किसी भी मंत्री का OSD केवल प्रशासनिक समन्वय का काम करता है, वह स्वतंत्र रूप से बड़े नीतिगत या वित्तीय फैसले नहीं ले सकता।
ऐसे में यदि विभाग में कोई विवादित निर्णय हुआ है, तो उसकी जवाबदेही केवल एक अधिकारी पर डालना कई नए सवाल पैदा करता है।
अधिकारियों में नाराजगी, मनोबल टूटने की आशंका
इस कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच भी नाराजगी देखी जा रही है। कई अधिकारियों का मानना है कि यदि जांच पूरी होने से पहले ही अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से दोषी ठहराया जाएगा, तो इससे पूरी प्रशासनिक व्यवस्था का मनोबल प्रभावित होगा।
अधिकारियों के बीच यह डर भी बढ़ रहा है कि भविष्य में किसी भी राजनीतिक विवाद की स्थिति में उन्हें आसानी से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
जनता भी बंटी, सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल
जनता के बीच भी इस पूरे मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे जवाबदेही तय करने की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग इसे राजनीतिक बचाव की रणनीति मान रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लगातार यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर जांच रिपोर्ट आने से पहले किसी अधिकारी को दोषी मान लेना कितना उचित है?
अब सबकी नजर अंतिम जांच रिपोर्ट पर
फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ी प्रतीक्षा जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट को लेकर है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद कई बड़े खुलासे हो सकते हैं और तब यह स्पष्ट होगा कि वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी।
लेकिन इतना तय है कि जांच पूरी होने से पहले OSD पर हुई कार्रवाई ने सरकार, मंत्री और पूरे प्रशासनिक तंत्र को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।



