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सक्ती- रॉयल्टी घोटाले की आंच से गरमाया सक्ती: प्रभावित गांवों का हक मारने का आरोप, आंदोलन की चेतावनी

डोलोमाइट खनन से त्रस्त ग्रामीणों के समर्थन में उतरे विधायक प्रतिनिधि राजेश लहरे

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, बोले— “हक नहीं मिला तो सड़क से लेकर कार्यालय तक होगा आंदोलन”-राजेश लहरें 

सक्ती।
सक्ती जिले में गौण खनिज रॉयल्टी राशि के वितरण को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। डोलोमाइट खनन से प्रभावित गांवों को नजरअंदाज कर कथित रूप से “अप्रभावित गांवों” को लाभ पहुंचाने के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे मामले को लेकर जांजगीर विधानसभा के विधायक प्रतिनिधि एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेश लहरे ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि वास्तविक प्रभावित ग्रामीणों को उनका अधिकार नहीं मिला, तो क्षेत्र में उग्र आंदोलन और हड़ताल की स्थिति निर्मित होगी।


खनन से गांवों में बढ़ी परेशानी

ज्ञापन के अनुसार, सक्ती जिले के मालखरौदा-जैजैपुर क्षेत्र अंतर्गत तहसील भोथिया के ग्राम अकलसरा, खमरिया, चीतापढरिया और झालरौंदा में लंबे समय से बड़े पैमाने पर डोलोमाइट खनन जारी है। खदानों में लगातार हो रही भारी ब्लास्टिंग से ग्रामीणों के मकानों में दरारें आने, कंपन महसूस होने और जनजीवन प्रभावित होने की शिकायत सामने आई है।

इसके अलावा क्षेत्र में धूल, वायु प्रदूषण और तेज आवाजों के कारण ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन कंपनियों की गतिविधियों का सीधा असर गांवों के वातावरण और जीवनशैली पर पड़ रहा है।


07 किलोमीटर दायरे के नियम की अनदेखी का आरोप

शासन के नियमों के अनुसार, खनिज उत्खनन क्षेत्र से प्रभावित 07 किलोमीटर की हवाई परिधि के गांवों में विकास कार्यों हेतु रॉयल्टी राशि खर्च किया जाना अनिवार्य है। लेकिन आरोप है कि तहसील स्तर पर तैयार की गई सूची में वास्तविक प्रभावित गांवों को किनारे कर अन्य गांवों को शामिल किया गया।

राजेश लहरे ने आरोप लगाया कि तहसीलदार भोथिया द्वारा भेजी गई सूची मनमाने तरीके से तैयार की गई है, जिससे प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों का हनन हो रहा है और विकास कार्यों की मूल भावना खत्म हो रही है।

“जो गांव खनन की मार झेल रहे हैं, उन्हीं को योजना से बाहर रखा जा रहा है। यह ग्रामीणों के अधिकारों के साथ अन्याय है।”
— राजेश लहरे


ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें

कलेक्टर को सौंपे गए पत्र में निम्न मांगें प्रमुख रूप से रखी गई हैं:

  • विवादित सूची के आधार पर रॉयल्टी राशि वितरण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  • सभी प्रस्तावित कार्यों का स्थल निरीक्षण कराया जाए।
  • जियो-टैग फोटो और वास्तविक सत्यापन के बाद ही राशि स्वीकृत की जाए।
  • केवल वास्तविक प्रभावित गांवों को ही विकास कार्यों के लिए राशि आवंटित की जाए।
  • पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

कई विभागों में मचा हड़कंप

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत की प्रतिलिपि जिला पंचायत, एसडीएम कार्यालय, खनिज विभाग, जनपद पंचायत जैजैपुर और संबंधित तहसील कार्यालयों को भी भेजी गई है। ज्ञापन पर 25 मई 2026 की प्राप्ति मुहर लगने के बाद अब प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस मामले में स्पष्ट कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।


ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन की परीक्षा

खनन प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण अब खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करने लगे हैं। उनका कहना है कि जिन गांवों ने वर्षों से प्रदूषण, ब्लास्टिंग और सड़क क्षति झेली, यदि उन्हें ही विकास राशि से वंचित किया जाएगा तो यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अब सबकी नजर जिला प्रशासन पर टिकी हुई है कि वह इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में प्रभावित गांवों को उनका अधिकार मिल पाता है या नही।

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