
महासमुंद/पिथौरा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) फेस-IV के तहत ग्राम पंचायत डोंगरीपाली के आश्रित ग्राम लालमाटी में स्वीकृत 1 करोड़ 81 लाख 59 हजार रुपये की सड़क इन दिनों बड़े विवाद का कारण बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन द्वारा स्वीकृत मूल मार्ग को बदलकर सड़क निर्माण को दूसरे पारा की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इतना ही नहीं, ग्रामीण अब यह भी दावा कर रहे हैं कि जब उन्होंने इस कथित रूट परिवर्तन का विरोध शुरू किया और प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक शिकायतें पहुंचाईं, तब सड़क निर्माण स्थल पर लगे सरकारी बोर्ड से “टिकरापारा” शब्द को ही पेंट कर मिटा दिया गया।
इस पूरे मामले ने अब केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि योजना के दस्तावेजों, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
📌 सरकारी बोर्ड में स्पष्ट लिखा था—‘लालमाटी टिकरापारा’
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण कार्य शुरू होने के समय लगाए गए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के बोर्ड में स्पष्ट रूप से लिखा गया था—
“L044 कटंगतराई-छोटेलोरम रोड से लालमाटी टिकरापारा”
बोर्ड में पैकेज क्रमांक CG-1282, सड़क की लंबाई 2.40 किलोमीटर और 181.59 लाख रुपये की स्वीकृत लागत का उल्लेख भी किया गया था।
ग्रामीणों का कहना है कि भूमिपूजन के समय से लेकर काफी समय बाद तक बोर्ड पर “लालमाटी टिकरापारा” साफ-साफ अंकित था और इसी आधार पर ग्रामीणों को विश्वास था कि सड़क स्वीकृत मार्ग पर ही बनेगी।

📸 भूमिपूजन के समय सरपंच ने साझा की थीं तस्वीरें
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान ग्राम पंचायत स्तर पर उत्साह का माहौल था। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत डोंगरीपाली की सरपंच श्रीमती नीलूवती पटेल ने स्वयं भूमिपूजन कार्यक्रम की तस्वीरें ग्राम पंचायत के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की थीं और सड़क स्वीकृत होने पर प्रसन्नता व्यक्त की थी।
ग्रामीणों का दावा है कि उस समय भी सड़क को लालमाटी टिकरापारा मार्ग के रूप में ही प्रचारित और प्रस्तुत किया गया था। इसलिए अब जब मार्ग परिवर्तन की चर्चा सामने आ रही है, तो ग्रामीण इसे संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं।

🔥 विरोध शुरू हुआ तो बोर्ड से ही गायब हो गया ‘टिकरापारा’?
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने सड़क को बस्तीपारा की ओर ले जाने का विरोध शुरू किया और कलेक्टर, जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों के पास शिकायतें पहुंचने लगीं, तब निर्माण स्थल पर लगे बोर्ड में बदलाव किया गया।
ग्रामीणों का दावा है कि पहले जहां बोर्ड पर “लालमाटी टिकरापारा” लिखा हुआ था, वहीं अब “टिकरापारा” शब्द को पेंट कर ढंक दिया गया है।

ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि सड़क की स्वीकृति और मार्ग में कोई बदलाव नहीं हुआ है, तो बोर्ड में फेरबदल की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि मार्ग बदला गया है, तो उसका अधिकृत आदेश और प्रशासनिक स्वीकृति कहां है?
🚧 बोर्ड पर टिकरापारा, निर्माण की चर्चा बस्तीपारा की ओर
दीपापारा, टिकरापारा और आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण को मूल स्वीकृत मार्ग से हटाकर बस्तीपारा की ओर ले जाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो जिन लोगों के लिए सड़क स्वीकृत की गई थी, वे उसके लाभ से वंचित हो जाएंगे।
उनका सीधा सवाल है—
जब शासन ने टिकरापारा तक सड़क निर्माण की स्वीकृति दी थी, तो फिर निर्माण को दूसरी दिशा में ले जाने का आधार क्या है?
⚠️ करीब दो करोड़ की परियोजना पर उठ रहे गंभीर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि 1.81 करोड़ रुपये की इस परियोजना में यदि स्वीकृत डीपीआर, नक्शा और प्रस्ताव से अलग कार्य किया जा रहा है, तो यह केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि सार्वजनिक धन और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराई जाए और सभी संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं।
📝 कलेक्टर कार्यालय में शिकायत, विधायक को सौंपा गया ज्ञापन
ग्रामीणों ने महासमुंद कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की है। शिकायत की प्राप्ति रसीद (पावती क्रमांक 1254) भी ग्रामीणों के पास मौजूद है।
इसके अलावा बसना विधानसभा क्षेत्र के विधायक को भी ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

🔍 RTI के जरिए मांगे गए महत्वपूर्ण दस्तावेज
ग्रामीणों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत कार्यपालन अभियंता महासमुंद और जनपद पंचायत पिथौरा से निम्न दस्तावेज मांगे हैं—
- ग्राम पंचायत के प्रस्ताव,
- सड़क स्वीकृति से जुड़े अभिलेख,
- मार्ग निर्धारण संबंधी दस्तावेज,
- डीपीआर और तकनीकी स्वीकृति,
- संबंधित प्रशासनिक आदेश।
ग्रामीणों का कहना है कि दस्तावेज सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि सड़क वास्तव में किस मार्ग के लिए स्वीकृत हुई थी और क्या बाद में किसी स्तर पर बदलाव किया गया।

🚩 अब सबसे बड़ा सवाल
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
यदि सड़क शुरू से लालमाटी टिकरापारा के नाम पर स्वीकृत थी, भूमिपूजन उसी नाम से हुआ, बोर्ड पर भी वही लिखा था, तो फिर विरोध के बाद बोर्ड से ‘टिकरापारा’ शब्द क्यों हटाया गया?
यही सवाल अब ग्रामीण प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से पूछ रहे हैं।

✍️ निष्कर्ष
लालमाटी की यह सड़क अब केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि ग्रामीणों के अधिकार, सरकारी रिकॉर्ड की पारदर्शिता और करोड़ों रुपये की योजना की विश्वसनीयता का मुद्दा बन चुकी है। ग्रामीणों की शिकायतों और आरोपों के बीच अब सबकी नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।
यदि बोर्ड, भूमिपूजन और दस्तावेज टिकरापारा की ओर इशारा करते हैं, तो फिर निर्माण की दिशा और बोर्ड में बदलाव को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देना जिम्मेदार अधिकारियों के लिए जरूरी हो गया है। 🚧⚖️📋



