
सक्ती- जैजैपुर। ग्रामीण विकास को नई दिशा देने और ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब शहरों की तर्ज पर ग्राम पंचायतों को भी संपत्तिकर (प्रॉपर्टी टैक्स) वसूलने का अधिकार दिया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी निर्देशों के बाद पंचायत स्तर पर कर निर्धारण और वसूली की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
सरकार का मानना है कि पंचायतों की अपनी आय बढ़ने से वे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों और जनसुविधाओं के लिए अधिक संसाधन जुटा सकेंगी। इसके तहत मकान, भूमि, बाजार बैठकी, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य उद्यमी गतिविधियों पर कर लगाया जा सकेगा।
📌 पंचायतों को दिए गए विशेष अधिकार
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जनपद पंचायतों को निर्देश जारी कर ग्राम पंचायतों में संपत्तिकर निर्धारण एवं कर संकलन की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने को कहा है। इसके लिए सरपंच, सचिव, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा शिक्षकों को भी जनजागरूकता और सहयोग के लिए जिम्मेदारी दी जा रही है।
शासन ने पंचायतों को वैकल्पिक कर, शुल्क और फीस अधिरोपित करने तथा उनका संकलन करने का अधिकार भी प्रदान किया है। संपत्तिकर के साथ जलकर लगाए जाने की भी संभावना जताई गई है।
🏠 किन संपत्तियों पर लगेगा कर?
निर्देशों के अनुसार पंचायत क्षेत्र में स्थित भूमि, भवन अथवा भूमि एवं भवन सहित ऐसी संपत्तियां जिनका मूल्यांकन 6 हजार रुपये से अधिक होगा, उन्हें संपत्तिकर के दायरे में लाया जाएगा।
कर की दर और निर्धारण की प्रक्रिया ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव के माध्यम से तय की जाएगी। पंचायतें स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कर निर्धारण कर सकेंगी।
🏢 सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थान भी होंगे दायरे में
सिर्फ निजी आवासीय और व्यावसायिक भवन ही नहीं, बल्कि पंचायत क्षेत्र में स्थित विभिन्न संस्थानों की संपत्तियों को भी कराधान प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
इनमें निगम, मंडल, बोर्ड, ट्रस्ट और अन्य प्राधिकरण शामिल हैं, जैसे—
- विद्युत वितरण कंपनियां
- पर्यटन विकास बोर्ड
- वनोपज सहकारी संघ
- खनिज विकास निगम
- कृषि उपज मंडी एवं विपणन बोर्ड
- अन्य सरकारी एवं अर्ध-सरकारी संस्थान
इनकी पंचायत क्षेत्र में स्थित संपत्तियों का भी मूल्यांकन कर संपत्तिकर वसूला जा सकेगा।
📈 पंचायतों की आय बढ़ाने पर जोर
ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से बाजार बैठकी, हाट-बाजार और अन्य स्थानीय गतिविधियों पर कर वसूली की व्यवस्था लागू है। अब संपत्तिकर लागू होने से पंचायतों की आय में और वृद्धि होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वयं की आय बढ़ने पर पंचायतें सड़क, नाली, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए बाहरी सहायता पर कम निर्भर रहेंगी।
🗣️ ग्रामीणों से सहयोग की अपील
जनपद स्तर पर बैठकों के बाद कई पंचायतों ने कर निर्धारण की तैयारी शुरू कर दी है। सरपंच और सचिव ग्रामीणों से सहयोग की अपील कर रहे हैं तथा सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से लोगों को नई व्यवस्था की जानकारी दी जा रही है।
ग्रामीण स्वशासन की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि पंचायतों को वित्तीय रूप से मजबूत किए बिना ग्रामीण विकास की गति तेज नहीं हो सकती। ऐसे में संपत्तिकर व्यवस्था को ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भर पंचायतों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इस नए कर को लेकर चर्चा भी शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में इसके प्रभाव को लेकर व्यापक बहस देखने को मिल सकती है।



