सक्ती – पंचायती राज अधिनियम की उड़ीं धज्जियां: जैजैपुर के कोटेतरा में उपसरपंच ने पद पर रहते हुए अपने ही नाम पर फूंके 26.80 लाख, ग्रामीण हाईकोर्ट जाने को तैयार
जैजैपुर जनपद का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला: साक्ष्य और बैंक स्टेटमेंट के साथ शिकायत के बाद भी जांच फाइल दबाए बैठे अफसर, अब FIR और धारा-92 के तहत रिकवरी की मांग तेज

जैजैपुर / सक्ती (छत्तीसगढ़) – जनपद पंचायत जैजैपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कोटेतरा में पंचायती राज अधिनियम को खुलेआम ठेंगा दिखाते हुए शासकीय खजाने में सेंधमारी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ पद का दुरुपयोग कर 26 लाख 80 हजार 500 रुपये की सरकारी राशि का फर्जी तरीके से भुगतान अपने ही नाम पर करा लिया गया। मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी ने अब ग्रामीणों को बिलासपुर हाईकोर्ट में PIL दायर करने के लिए मजबूर कर दिया है।
पद पर रहते हुए खुद ही बन गए वेंडर, खुद के खाते में लाखों का भुगतान
छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम स्पष्ट कहता है कि पंचायत का कोई भी निर्वाचित पदाधिकारी – सरपंच, उपसरपंच या पंच – अपने कार्यकाल के दौरान वेंडर या सप्लायर बनकर पंचायत निधि से सीधे अपने नाम पर राशि आहरित नहीं कर सकता। यह सीधे-सीधे पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
लेकिन कोटेतरा में नियम-कानून को ताक पर रख दिया गया। प्राप्त दस्तावेजों और बैंक स्टेटमेंट के अनुसार पूर्व उपसरपंच देवानन्द यादव ने अपने पद और रसूख का दुरुपयोग करते हुए अपने ही नाम पर लाखों रुपये का आहरण कर लिया। इस पूरे खेल में पूर्व सरपंच भगवती गोड़ और तत्कालीन सचिव रविन्द्र किशोर चन्द्रा ने मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई। दोनों ने चेक और वाउचरों पर हस्ताक्षर कर सीधे उपसरपंच के निजी खाते में शासकीय राशि ट्रांसफर कर दी।
साक्ष्यों के साथ शिकायत, फिर भी अधिकारी मौन
जागरूक ग्रामीणों ने जनपद सीईओ से लेकर जिला प्रशासन तक लिखित शिकायत मय बैंक ट्रांजैक्शन और दस्तावेजों के साथ की है। नियमानुसार इस मामले में तत्काल पंचायती राज अधिनियम की धारा 92 के तहत रिकवरी और FIR दर्ज होनी चाहिए थी।
लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की इस रहस्यमयी चुप्पी से साफ है कि दोषियों को विभागीय संरक्षण दिया जा रहा है। इसी से नाराज होकर अब ग्रामीण सारे दस्तावेजों के साथ हाईकोर्ट बिलासपुर में जनहित याचिका दायर कर स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच और दोषियों को जेल भेजने की मांग करेंगे।
इस मामले में वर्जन:
“ग्राम पंचायत कोटेतरा में नियम विरुद्ध वित्तीय भुगतान का मामला बेहद गंभीर है। पंचायती राज अधिनियम के तहत कोई भी पदाधिकारी स्वयं के नाम पर भुगतान प्राप्त नहीं कर सकता। पूर्व में प्राप्त शिकायत के आधार पर दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण कराया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों से शत-प्रतिशत राशि की वसूली और पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की सख्त वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।”
संदीप कश्यप, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत जैजैपुर



