
जैजैपुर/सक्ति (छत्तीसगढ़):
ग्राम पंचायत भोथिया से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पंचायती राज व्यवस्था की साख पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनने वाली पंचायत, अब ‘पति राज’ का अड्डा बनती नजर आ रही है—जहां निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके पति सारे फैसले लेते दिखाई दे रहे हैं।
चुनाव महिलाओं का, राज पतियों का!
शिकायतकर्ता दिनेश चंद्रा के खुलासे ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। आरोप है कि पंचायत में चुनी गई महिला पंच केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि असली संचालन उनके पति कर रहे हैं।
👉 हैरान करने वाले तथ्य:
- पंचायत बैठकों में महिला पंचों की जगह उनके पति लेते हैं कुर्सी
- सरकारी रजिस्टर में प्रस्ताव लिखने से लेकर हस्ताक्षर तक—सब पति कर रहे
- वित्तीय लेन-देन में भी पतियों की सीधी भूमिका
लोकतंत्र की जड़ों पर चोट
यह पूरा मामला पंचायती राज अधिनियम 1993 और सरकारी नियमों की खुली अवहेलना है।
महिलाओं को 50% आरक्षण देकर जो अधिकार दिए गए थे, उन्हें इस ‘छाया शासन’ ने बेमानी बना दिया है।
“यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि लोकतंत्र के मूल ढांचे पर सीधा हमला है।”
CEO का एक्शन: अब होगी सख्त जांच
मामले के सामने आते ही जिला पंचायत प्रशासन ने तुरंत सख्ती दिखाई है।
⚠️ प्रशासनिक कार्रवाई:
- पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी
- 3 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया
- सभी दस्तावेजों की जांच के आदेश
- दोषी पाए जाने पर बर्खास्तगी तक की चेतावनी
गांव में हलचल, भरोसे पर संकट
भोथिया पंचायत में इस खुलासे के बाद माहौल गरमा गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब “पर्दे के पीछे” से पंचायत चलाई जाएगी, तो पारदर्शिता और विकास दोनों प्रभावित होंगे।
बड़ा सवाल: क्या खत्म होगा ‘पति राज’?
यह मामला अब सिर्फ एक पंचायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रहा है—
क्या महिला प्रतिनिधियों को वास्तव में उनका अधिकार मिल पाएगा, या ‘पति राज’ यूं ही हावी रहेगा?



