
📍 सक्ती, 03 मई 2026
आईपीएल मैचों के दौरान चल रहे अवैध सट्टा कारोबार पर सक्ती पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित सट्टा गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने कुल 05 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से सट्टा संचालन में प्रयुक्त मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
🔥 ऐसे खुला सट्टा नेटवर्क का राज
पुलिस अधीक्षक श्री प्रफ्फुल कुमार ठाकुर (IPS) के निर्देश पर जिले में सट्टा गतिविधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी अभियान के तहत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पंकज पटेल और एसडीओपी डॉ. भुवनेश्वरी पैकरा के मार्गदर्शन में सक्ती पुलिस और साइबर टीम ने संयुक्त रूप से तकनीकी निगरानी शुरू की।
📅 29 अप्रैल 2026 को मुखबिर की सूचना पर पहली कार्रवाई करते हुए भुपेन्द्र राठौर को गिरफ्तार किया गया, जो ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स के जरिए IPL सट्टा चला रहा था।
📱 QR कोड और WhatsApp से चलता था सट्टा
जांच में सामने आया कि आरोपी QR कोड जनरेट कर और WhatsApp के माध्यम से ID-पासवर्ड देकर लोगों को सट्टा खेलने के लिए जोड़ते थे।
💰 सट्टे की रकम का लेन-देन PhonePe और अन्य डिजिटल पेमेंट ऐप्स के जरिए किया जा रहा था।
🔗 परत-दर-परत खुलता गया गिरोह
प्रारंभिक गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया और अलग-अलग समय पर छापेमारी कर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ते हुए कुल 5 आरोपियों को पकड़ लिया।
👉 जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपी अपने बैंक खाते सट्टा लेन-देन के लिए उपलब्ध कराते थे।
👮♂️ गिरफ्तार आरोपी
- भुपेन्द्र राठौर (28 वर्ष) – रानीसागर पारा, सक्ती
- चंद्रेशकुमार राठौर (32 वर्ष) – नंदौर खुर्द
- मुकेश अग्रवाल (46 वर्ष) – स्टेशन रोड, सक्ती
- पिंटू जायसवाल (24 वर्ष) – झूलकदम, सक्ती
- संजय केंवट (28 वर्ष) – ग्राम गढ़गोढ़ी
📌 क्या-क्या हुआ जब्त
- 📲 05 मोबाइल फोन
- 💾 सट्टा संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य
🚨 पुलिस का अगला कदम
पुलिस अब इस गिरोह के बाकी सदस्यों की तलाश में जुटी है और पूरे सट्टा नेटवर्क के चैन-सर्कल को खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई जारी है।
🙏 आम जनता से अपील
सक्ती पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अवैध सट्टा गतिविधियों से दूर रहें और ऐसी कोई जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
👉 निष्कर्ष:
सक्ती पुलिस की यह कार्रवाई दिखाती है कि अब ऑनलाइन सट्टा गिरोह भी पुलिस की नजर से बच नहीं पा रहे हैं। तकनीकी जांच और साइबर टीम की मदद से ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की दिशा में मजबूत कदम उठाए जा रहे हैं।



