
📍 जांजगीर-चांपा / सक्ती | विशेष रिपोर्ट
ग्राम पंचायत कोटेतरा (जनपद पंचायत जैजैपुर) में 15वें वित्त आयोग की राशि को लेकर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। कागज़ों में लाखों रुपये “जारी” दिख रहे हैं, लेकिन पंचायत के खाते में एक रुपया भी नहीं पहुंचा। अब यह मामला सीधे तौर पर जिला पंचायत जांजगीर-चांपा और नवगठित जिला पंचायत सक्ती के बीच जिम्मेदारी तय करने का बन गया है।
💣 ₹4.85 लाख जारी… लेकिन गायब!
15वें वित्त आयोग (2024-25) की पहली किस्त—
- ₹2,91,014 (अनटाइड)
- ₹1,94,010 (टाइड)
👉 कुल ₹4,85,024
👉 रिकॉर्ड में राशि जारी ✔️
👉 पंचायत खाते में राशि शून्य ❌
तो फिर पैसा अटका कहां?

🧾 सरपंच का सीधा आरोप—“काम ठप, पैसा नहीं”
सरपंच श्रीमती सुनीता रमेश साहू ने खुलासा किया—
👉 “राशि नहीं मिली, इसलिए विकास कार्य पूरी तरह बंद हैं।”
यानी कागज़ों में विकास दौड़ रहा है, लेकिन ज़मीन पर सन्नाटा पसरा है।
⚡ दो जिलों के बीच फंसी जिम्मेदारी
इस मामले ने नया मोड़ तब लिया जब—
👉 यह बात सामने आई कि राशि जारी होने का समय जिला पंचायत पुनर्गठन से पहले का हो सकता है
अब सवाल उठ रहे हैं—
- क्या यह मामला जिला पंचायत जांजगीर-चांपा के कार्यकाल का है?
- या जिम्मेदारी अब नवगठित जिला पंचायत सक्ती की है?
👉 दोनों स्तर पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से स्थिति और उलझ गई है
❓ बीच रास्ते में “गायब” पैसा—कौन जिम्मेदार?
सरकारी सिस्टम के अनुसार—
👉 राज्य से पैसा निकला ✔️
👉 जिला स्तर तक पहुंचा ✔️
👉 पंचायत में नहीं पहुंचा ❌
तो फिर—
👉 फाइलों में पैसा “पूरा” कैसे दिख रहा है?
👉 सिस्टम में एंट्री है, लेकिन खाते में ट्रांसफर क्यों नहीं?
🔥 ग्रामीणों में गुस्सा—अब बर्दाश्त नहीं
गांव के लोगों का साफ कहना है—
👉 सड़क, नाली, पानी जैसे काम रुके पड़े हैं
👉 अधिकारी सिर्फ पत्राचार में समय बिता रहे हैं
👉 “गलती चाहे किसी भी जिले की हो, नुकसान गांव का हो रहा है”
⚠️ विभाग एक्शन मोड में, लेकिन जवाब अब भी गायब
पंचायत संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने—
✔️ जांच के आदेश दिए
✔️ रिपोर्ट मांगी
✔️ जिम्मेदारों पर कार्रवाई की बात कही
लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस हल नहीं निकला है।
🚨 अब निर्णायक सवाल
👉 जिला पंचायत जांजगीर-चांपा या
👉 जिला पंचायत सक्ती
👉 आखिर जिम्मेदारी किसकी है?
👉 और सबसे अहम—
“जनता के विकास का पैसा आखिर गया कहां?”
🛑 अगर जल्द सच्चाई सामने नहीं आई, तो यह मामला सिर्फ फंड गड़बड़ी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन जाएगा।



